क्या जिराफ़ कर सकते हैं गणित? वैज्ञानिकों की नई खोज ने सबको चौंका दिया ||
👉5 जुलाई 2026: क्या जानवर भी गणित समझ सकते हैं? यह सवाल लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय रहा है। अब एक नए अध्ययन ने इस बहस को और दिलचस्प बना दिया है। शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि जिराफ़ (Giraffe) केवल अपनी लंबी गर्दन और ऊँचाई के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी सोचने और तुलना करने की क्षमता के लिए भी खास हो सकते हैं। अध्ययन में पाया गया कि जिराफ़ साधारण गणितीय तुलना (Basic Numerical Comparison) जैसी क्षमता दिखा सकते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि वे इंसानों की तरह जोड़, घटाव या गुणा कर सकते हैं।
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने जिराफ़ों के सामने अलग-अलग मात्रा में भोजन रखा। कुछ बर्तनों में अधिक भोजन था, जबकि कुछ में कम। यह देखने के लिए कि जिराफ़ किसे चुनते हैं, उन्हें कई बार ऐसे विकल्प दिए गए जिनमें भोजन की मात्रा अलग-अलग थी। अधिकांश मामलों में जिराफ़ बार-बार उस बर्तन की ओर गए जिसमें भोजन अधिक था। इससे वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला कि वे दो समूहों के बीच मात्रा का अंतर पहचान सकते हैं।
इस क्षमता को वैज्ञानिक Numerical Discrimination कहते हैं। इसका अर्थ है कि कोई जीव दो अलग-अलग समूहों में वस्तुओं की संख्या या मात्रा का अनुमान लगाकर बेहतर विकल्प चुन सकता है। यह पूर्ण गणित नहीं, बल्कि एक बुनियादी संज्ञानात्मक (Cognitive) क्षमता है, जो जीवित रहने में मदद करती है। जंगल में यह कौशल भोजन, साथी या खतरे का आकलन करने में उपयोगी हो सकता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी क्षमता पहले Chimpanzee, Elephant, Crow, Parrot और कुछ मछलियों में भी देखी जा चुकी है। अब इस सूची में जिराफ़ों का नाम जुड़ने से यह संकेत मिलता है कि संख्यात्मक तुलना की क्षमता प्रकृति में पहले से कहीं अधिक व्यापक हो सकती है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, जिराफ़ों का मस्तिष्क भोजन की उपलब्धता से जुड़े निर्णय बहुत तेजी से लेता है। यदि दो पेड़ों पर अलग-अलग मात्रा में पत्तियाँ हों, तो अधिक भोजन वाले पेड़ को चुनना उनके लिए ऊर्जा बचाने और जीवित रहने की दृष्टि से फायदेमंद होता है। संभव है कि इसी कारण समय के साथ उनमें मात्रा का अनुमान लगाने की क्षमता विकसित हुई हो।
हालाँकि वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस शोध को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं समझना चाहिए। अध्ययन में कहीं भी यह दावा नहीं किया गया कि जिराफ़ स्कूल के बच्चों की तरह गणित के सवाल हल कर सकते हैं। वे केवल दो समूहों की तुलना कर सकते हैं और अधिक लाभ वाले विकल्प को चुनने की प्रवृत्ति दिखाते हैं। इसलिए "जिराफ़ गणित कर सकते हैं" कहना पूरी तरह सही नहीं होगा। सही बात यह है कि वे मात्रा का अनुमान लगाने की क्षमता रखते हैं।
इस शोध का एक बड़ा महत्व पशुओं की बुद्धिमत्ता को बेहतर ढंग से समझना भी है। यदि अलग-अलग प्रजातियों में ऐसी संज्ञानात्मक क्षमताएँ पाई जाती हैं, तो इससे यह जानने में मदद मिल सकती है कि बुद्धिमत्ता का विकास (Evolution of Intelligence) कैसे हुआ और विभिन्न जीव अपने वातावरण के अनुसार निर्णय कैसे लेते हैं।
वैज्ञानिक अब यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या जिराफ़ बड़ी संख्याओं की तुलना भी कर सकते हैं, क्या वे समय के साथ इस क्षमता को बेहतर बनाते हैं और क्या जंगली तथा चिड़ियाघर में रहने वाले जिराफ़ों की क्षमता में कोई अंतर होता है। इन सवालों के जवाब भविष्य के अध्ययनों से मिल सकते हैं।
निष्कर्ष
नई रिसर्च से पता चलता है कि जिराफ़ साधारण संख्यात्मक तुलना करने की क्षमता रखते हैं। वे इंसानों की तरह गणित नहीं करते, लेकिन अधिक और कम मात्रा में अंतर पहचानकर बेहतर निर्णय ले सकते हैं। यह खोज इस बात का एक और प्रमाण है कि जानवरों की बुद्धिमत्ता हमारी कल्पना से कहीं अधिक जटिल और रोचक हो सकती है।
