शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स और निफ्टी में 2% से अधिक की भारी गिरावट ||
8 जुलाई 2026 को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। दिनभर की बिकवाली के बाद बीएसई सेंसेक्स लगभग 1,677 अंक टूटकर 76,503.60 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 517 अंकों की गिरावट के साथ 23,882.05 पर बंद हुआ। यह पिछले तीन महीनों की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट मानी जा रही है। इस तेज गिरावट के कारण निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग ₹8 लाख करोड़ की कमी आ गई, जिससे पूरे बाजार में चिंता का माहौल बन गया।
विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव रहा। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने तथा संघर्षविराम समाप्त होने की खबरों के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में तेज उछाल आया। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में से एक है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था, महंगाई और कंपनियों की लागत पर सीधा असर डालती हैं। यही वजह रही कि निवेशकों ने बड़ी मात्रा में शेयरों की बिकवाली शुरू कर दी।
बाजार में गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। बैंकिंग, आईटी, ऑटोमोबाइल, तेल एवं गैस, एफएमसीजी और मेटल जैसे लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों की कमजोरी पूरे बाजार में फैली हुई थी, न कि किसी एक सेक्टर तक सीमित।
विश्लेषकों का कहना है कि जब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अस्थिर होती हैं, तब विदेशी निवेशक (FII) जोखिम कम करने के लिए उभरते बाजारों से पैसा निकालना शुरू कर देते हैं। इसके अलावा, हाल के सप्ताहों में बाजार में अच्छी तेजी आने के कारण कई निवेशकों ने मुनाफावसूली (Profit Booking) भी की। कमजोर वैश्विक संकेत, बढ़ती तेल कीमतें और कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी।
इस गिरावट का असर केवल शेयर बाजार तक ही सीमित नहीं रहा। भारतीय रुपये में भी कमजोरी देखी गई, जबकि सरकारी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हुई। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे महंगाई बढ़ सकती है, आयात बिल में वृद्धि हो सकती है और आर्थिक विकास की गति पर भी असर पड़ सकता है। यही कारण है कि निवेशक फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर बाजार में ऐसी गिरावट निवेश का सामान्य हिस्सा होती है। यदि वैश्विक तनाव कम होता है, तेल की कीमतों में स्थिरता आती है और कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद के अनुरूप रहते हैं, तो बाजार में दोबारा सुधार देखने को मिल सकता है। दीर्घकालिक निवेशकों को घबराकर निर्णय लेने के बजाय आर्थिक संकेतकों और आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए।
कुल मिलाकर, 8 जुलाई 2026 का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। सेंसेक्स और निफ्टी में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट, निवेशकों के लगभग ₹8 लाख करोड़ के नुकसान और वैश्विक तनाव के बढ़ते प्रभाव ने यह दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर भारतीय वित्तीय बाजारों पर कितना गहरा हो सकता है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव और कंपनियों के तिमाही परिणामों पर बनी रहेगी, क्योंकि यही कारक बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं।
