रूस–यूक्रेन युद्ध जारी: क्या है मौजूदा स्थिति ||
👉रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में शुरू हुआ युद्ध अब भी जारी है और वर्ष 2026 में भी संघर्ष थमने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। दोनों देशों के बीच लगातार मिसाइल, ड्रोन और तोपखाने से हमले हो रहे हैं। हाल के दिनों में युद्ध एक बार फिर तेज हो गया है, जिससे नागरिकों और सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
2 जुलाई 2026 को रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव सहित कई शहरों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार इन हमलों में कई लोगों की जान गई और दर्जनों घायल हुए। कई रिहायशी इमारतें, सड़कें और अन्य नागरिक ढांचे भी क्षतिग्रस्त हुए। दूसरी ओर, रूस का कहना है कि उसने केवल सैन्य और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया तथा यह कार्रवाई हाल के यूक्रेनी हमलों के जवाब में की गई।
इधर यूक्रेन भी केवल रक्षात्मक रणनीति तक सीमित नहीं है। हाल के महीनों में उसने रूस के अंदर स्थित तेल रिफाइनरियों, ईंधन डिपो, सैन्य ठिकानों और लॉजिस्टिक नेटवर्क पर लंबी दूरी के ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। इन हमलों का उद्देश्य रूस की सैन्य आपूर्ति और ईंधन व्यवस्था को कमजोर करना है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार इन हमलों से रूस के कुछ क्षेत्रों में ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई है और युद्ध का दबाव रूस के अंदर भी महसूस किया जा रहा है।
युद्ध का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं, जबकि हजारों नागरिकों की जान जा चुकी है। अस्पताल, स्कूल, बिजली संयंत्र और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी कई बार हमलों का शिकार बनी हैं। संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं लगातार मानवीय सहायता पहुंचाने और नागरिकों की सुरक्षा की अपील कर रही हैं।
इस युद्ध में अमेरिका, यूरोपीय देशों और नाटो के कई सदस्य यूक्रेन को आर्थिक, मानवीय और सैन्य सहायता दे रहे हैं। वहीं रूस का कहना है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए अभियान जारी रखेगा। इसी कारण शांति वार्ताओं के प्रयास अब तक स्थायी समाधान तक नहीं पहुंच पाए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह युद्ध अब केवल दो देशों के बीच सीमित संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार, खाद्यान्न आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ रहा है। तेल और गैस की कीमतों, वैश्विक व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था पर इसके प्रभाव लगातार दिखाई दे रहे हैं।
फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने सैन्य अभियानों को जारी रखे हुए हैं। यूक्रेन अधिक आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों और अंतरराष्ट्रीय समर्थन की मांग कर रहा है, जबकि रूस अपने सैन्य अभियानों को जारी रखने की बात कह रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में संघर्ष पूरी तरह समाप्त होने की संभावना कम है और युद्ध का परिणाम आने वाले महीनों में दोनों देशों की सैन्य क्षमता, अंतरराष्ट्रीय समर्थन और कूटनीतिक प्रयासों पर निर्भर करेगा।
